- आरव – 22 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र
- सिया – उसकी क्लासमेट, सुंदर और समझदार
- स्थान: देहरादून
आरव हमेशा से थोड़ा कन्फ्यूज किस्म का लड़का था। लाइफ में बड़े-बड़े सपने तो थे, लेकिन उन्हें पूरा करने की दिशा नहीं पता थी। हर चीज़ में उलझ जाता —
कोडिंग सीखे या डिजिटल मार्केटिंग?
MBA करे या खुद का स्टार्टअप शुरू करे?
और सबसे बड़ा सवाल —
“सिया को अपने दिल की बात बताऊं या नहीं?”
सिया उसकी क्लास में थी, तेज़ दिमाग वाली, लेकिन बेहद सरल स्वभाव की। दोनों की दोस्ती बहुत गहरी थी। कॉलेज की लाइब्रेरी हो या कैंटीन, हर जगह दोनों साथ दिखते थे। लेकिन आरव ने कभी हिम्मत नहीं जुटाई कि अपने दिल की बात कह सके।
हर बार सोचता,
“अगर मना कर दिया तो दोस्ती भी चली जाएगी।”
फिर खुद से लड़ता,
“पर अगर कहूं नहीं… तो शायद जिंदगी भर पछताना पड़े।”
🌸 एक शाम का मोड़
एक दिन कॉलेज में आखिरी सेमेस्टर की प्रोजेक्ट सबमिशन थी। दोनों ने साथ में ही प्रोजेक्ट बनाया था। उस दिन प्रेजेंटेशन के बाद, सिया ने कैंपस के बाहर वाले पुराने पीपल के पेड़ के नीचे बैठने को कहा।
सिया बोली,
“आरव, अब तो कॉलेज खत्म हो रहा है… आगे का क्या सोचा है?”
आरव मुस्कुराया, लेकिन मन में तूफान चल रहा था।
वो बोला,
“बस यही सोच रहा हूँ… क्या करूं, क्या न करूं।”
सिया उसकी आंखों में देखने लगी —
“कभी-कभी दिल की सुनना चाहिए, आरव। दिमाग बाद में काम आएगा।”
आरव ने धीरे से पूछा,
“तुम दिल की सुनती हो?”
सिया मुस्कराई,
“अगर दिल किसी की तरफ खिंच जाए… तो हाँ।”
आरव की धड़कनें तेज़ हो गईं। उसकी उलझन अब चरम पर थी।
एक तरफ डर था — कि दोस्ती टूट न जाए,
दूसरी तरफ दिल था — जो अब चुप नहीं रहना चाहता था।
❤️ दिल की बात
आरव ने लंबी सांस ली और कहा,
“सिया, मैं तुझसे कुछ महीनों से बहुत कुछ कहना चाहता था… लेकिन समझ नहीं पाया कि क्या करूं, क्या न करूं।
अब समझ में आ गया है —
जो सच्चा है, वो बोल देना चाहिए।”
सिया चुप रही।
आरव बोला,
“मैं तुम्हें पसंद करता हूँ, बहुत ज्यादा। शायद प्यार भी करता हूँ… लेकिन डरता रहा कि कहीं हमारी दोस्ती न टूट जाए। आज हिम्मत कर रहा हूँ — क्योंकि अब और नहीं झेल सकता ये उलझन।”
सिया कुछ पल खामोश रही, फिर धीमे से बोली:
“तुझे लगता है सिर्फ तू ही उलझा था?
मैं भी रोज़ सोचती थी… क्या करूं, क्या न करूं।”
आरव चौक गया।
सिया ने मुस्कुरा कर कहा,
“अब जब तूने कहा है… तो चलो ये उलझन खत्म करते हैं। हाँ, मुझे भी तू पसंद है।”
✨ अंत नहीं, शुरुआत
उस शाम, पहली बार आरव को लगा कि उलझनों से भागने के बजाय उनका सामना करना ज़रूरी है।
अब उसके लिए “क्या करें, क्या न करें” का जवाब साफ था —
जहाँ दिल हो, वहीं रास्ता हो।
💡 सीख:
- हर इंसान की ज़िंदगी में ऐसे पल आते हैं जब वह उलझ जाता है।
- पर अगर हम दिल की आवाज़ सुनें और हिम्मत से कदम बढ़ाएं, तो रास्ते खुद-ब-खुद बनते हैं।
- और कभी-कभी… उस एक “हां” से पूरी जिंदगी बदल जाती है।







